सीएनजी सब्सिडी, किराये में बढ़ोतरी की मांग पर ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने की हड़ताल, यात्रियों को करना पड़ा इंतजार

सीएनजी पर सब्सिडी, किराये में बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों के समर्थन में ऑटो-टैक्सी यूनियनों की हड़ताल का असर सोमवार को दिल्ली की सड़कों के तौर पर दिखीं। जगह-जगह ऑटो-टैक्सियां कतार में नजर आईं, लेकिन लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए इंतजार के बाद भी अधिक खर्च करना पड़ा। 

मुख्यमंत्री आवास के पास कुछ संगठनों के सदस्यों ने विरोध जताया तो कश्मीरी गेट, रानीबाग सहित और जगहों पर भी चालकों ने भी विरोध जताया। पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रहे चालकों को हिरासत में लेकर शाम के वक्त सिविल लाइंस थाने से छोड़ दिया। सरकार की तरफ से किराये पर विचार के लिए कमेटी गठित करने के बाद भी कैब चालकों ने मंगलवार को भी हड़ताल जारी रखने का फैसला लिया है। कुछ संगठनों ने यात्रियों की परेशानियों को देखते हुए मंगलवार की हड़ताल में फिलहाल शामिल न होने का निर्णय लेते हुए कहा कि विरोध जारी रहेगा। अपनी मांगें अब केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे।

सीएनजी की कीमतों में लगातार होने वाली बढ़ोतरी से परेशान चालकों ने पहले ही हड़ताल की घोषणा कर दी थी। संगठनों ने मांगें नहीं माने जाने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की भी घोषणा की थी। सोमवार को ऑटो-टैक्सी की हड़ताल में 15 से अधिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। बस अड्डे और रेलवे स्टेशनों के बाहर लाइन में टैक्सी और ऑटो खड़े नजर आए, लेकिन यात्रियों को बिठाने से इंकार करते दिखे। सीएनजी की कीमत में कमी, किराये में बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों पर चालकों की तरफ जंतर मंतर पर भी विरोध जताया गया। सीएनजी पर सब्सिडी देने और किराये में बढ़ोतरी की मांग के लिए सरकार की ओर से कमेटी गठित किए जाने के बाद भी हड़ताल वापस नहीं ली गई। हालांकि संगठनों में भी हड़ताल के लिए एकजुटता नहीं दिख रही है। इसलिए एक दिन, दो दिन तो कुछ संगठनों ने मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चतकालीन हड़ताल की भी चेतावनी दी थी।

दूसरे शहरों से पहुंचने वाले यात्रियों को चुकाना पड़ा दोगुना किराया
रेलवे स्टेशन, कश्मीरी गेट, आनंद विहार, सराय काले खां, आईएसबीटी सहित मेट्रो स्टेशनों से ऑटो, कैब और फीडर बसें न मिलने से यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कत हुई। खास तौर पर दूसरे राज्यों से रेल या बस में पहुंचने वालों को अधिक परेशानी हुई। रायपुर से पहुंचे विनय प्रजापति ने बताया कि हड़ताल का पता नहीं होने की वजह से सुबह से ही परिवार के साथ स्टेशन पर इंतजार कर रहे हैं। आखिरकार अपने दोस्त को फोन कर बुलाया। कैब और ऑटो की कमी से परेशान यात्री प्रीति दहिया ने बताया कि करीब 20 मिनट से पटेल चौक मेट्रो स्टेशन के पास ऑटो का इंतजार कर रही हैं।

गीता कॉलोनी जाने के लिए कैब बुक करने पर अधिक कीमत चुकाना पड़ा। दिलजीत सिंह ने बताया कि मैं हर दिन केंद्रीय सचिवालय के पास अपने कार्यालय के लिए एक टैक्सी लेता हूं, लेकिन काफी मुश्किलों के बाद करीब दो गुना भुगतान करना पड़ा। महाराष्ट्र से आई कविता ने कहा कि मुझे अपने परिवार के साथ नोएडा जाना था। करीब एक घंटे इंतजार के बाद भी 1500-2000 रुपये से कम खर्च में टैक्सी नहीं मिली। दिल्ली में करीब 90,000 ऑटो और 80000 टैक्सियां फिलहाल सड़कों पर चलती हैं। कैब और ऑटो चालकों की हड़ताल से परेशान वैभव ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें दफ्तर पहुंचने में भी देरी हुई।

कमेटी गठित होने के बाद भी संगठनों ने किया हड़ताल
दिल्ली सरकार की ओर से समयबद्ध तरीके से किराया संशोधन पर विचार करने के लिए एक समिति बनाने की घोषणा के बावजूद हड़ताल वापस लेने से यूनियनों ने इंकार कर दिया। सीएनजी की बढ़ती दरों से ऑटो, टैक्सी चालकों की परेशानी काफी बढ़ गई है। दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा कि सीएनजी पर 35 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी की मांग पर सुनवाई नहीं हुई है। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए संबंद्ध पांच संगठनों ने मंगलवार को हड़ताल में शामिल न होने का फैसला लिया है। हालांकि विरोध में उनके साथ हैं।

आज भी जारी रहेगी कैब चालकों की हड़ताल
दिल्ली सर्वोदय ड्राइवर्स एसोसिएशन के कमलजीत गिल और सर्वोदय ड्राइवर्स वेलफेयर एसोसिएशन के रवि राठौर ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर हड़ताल के बारे में चालकों को बताया जा रहा था। किसी को यात्रियों के साथ रोका नहीं गया। चालकों से अपील की जा रही थी कि यात्रा पूरी करने के बाद ही हड़ताल में शामिल हो। दोनों ने कहा कि कैब चालकों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रहेगी। इसके बाद भी सरकार ने अगर उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं की तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं।

हिरासत में लिए गए चालक छोड़े गए
करीब 12 बजे मुख्यमंत्री आवास के पास प्रदर्शन कर रहे चालकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। कमलजीत गिल ने बताया कि किराया, सीएनजी की कीमत सहित कैब चालकों की कई और मांगों की सरकार ने अनदेखी की है। अब उनके लिए परेशानी इतनी बढ़ गई है कि हड़ताल के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।

टैक्सी तक पहुंचने के लिए रिक्शा पर किया 150 रुपये खर्च
पंजाब निवासी लखन ने बताया कि कैब के लिए काफी इंतजार के बाद अब बुकिंग हुई है। लेकिन कैब चालक ने रेलवे स्टेशन से कुछ दूर पर बुलाया है। वहां तक रिक्शे पर अपने सामान के साथ जाने में भी 150 रुपये खर्च करना पड़ा। सुबह के वक्त काफी देर तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्रीपेड बूथ पर भी पर्चियां नहीं काटी जा रही थी, क्योंकि वहां मौजूद ऑटो या टैक्सी चालक कहीं भी जाने के लिए तैयार नहीं थे।

कैब का इंतजार भी गया बेकार, काम आए रिश्तेदार
कानपुर से आए टीपीएस गिल ने बताया कि तिलक नगर जाने के लिए उन्हें 600 रुपये की मांग की जा रही है। हालांकि प्रीपेड बूथ पर 330 की पर्ची कटती है। राजधानी से सफर के बाद दिल्ली पहुंची मीनाक्षी ने बताया कि करीब दो घंटे के इंतजार भी उन्हें घर पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है। अपने बच्चों और सामान के साथ इंतजार करते हुए कैब की बुकिंग करवाने की कोशिशें बेकार गईं। आखिरकार, अपने एक रिश्तेदार को बुलाया ताकि सभी घर तक पहुंच सकें।

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