मुख्यमंत्री केजरीवाल के किराया भुगतान संबंधी आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 15 Apr 2022 05:54 AM IST

सार

अधिवक्ता जैन ने मामले में जल्द सुनवाई का आग्रह करते हुए कहा, मामला लोगों के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। पिछले साल 29 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, केजरीवाल ने मकान मालिकों से आग्रह किया था कि उन किरायेदारों से किराए की वसूली न करें, जो गरीबी से त्रस्त हैं और यह भी वादा किया कि कोई किरायेदार गरीबी में भुगतान करने में असमर्थ है तो सरकार उनकी ओर से भुगतान करेगी। 

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उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के किराया भुगतान करने में असमर्थ किसी भी व्यक्ति के किराए का भुगतान करने के बयान संबंधी सिंगल जज के आदेश पर रोक लगा दी है। सिंगल जज ने बयान के आधार पर दिल्ली सरकार को किराएदारों के भुगतान के लिए नीति बनाने का निर्देश दिया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार की अपील पर यह रोक लगाई है। पीठ ने 27 सितंबर 2021 को न्यायमूर्ति प्रतिभा एन. सिंह द्वारा पारित फैसले के संचालन, क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए सरकार से भी कहा कि आप कह सकते हैं, तो साहस पूर्वक कहें कि मेरा कोई इरादा नहीं था लेकिन मैंने बयान दिया था। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 27 सितंबर तय की है।  

याचिका पांच प्रवासी मजदूरों द्वारा दायर की गई थी, जो दिल्ली के सीएम द्वारा दिए  बयानों पर विश्वास करते हुए दिल्ली में रुके थे। प्रवासी मजदूरों की ओर से पेश अधिवक्ता गौरव जैन ने बताया कि दिल्ली के सीएम द्वारा दिए बयान और इस तरह के कृत्य से जनता के बीच विश्वास की कमी होगी। दिल्ली सरकार की ओर से पेश गौतम नारायण ने याचिकाकर्ता की वास्तविकता पर सवाल उठाया और कहा कि बयान आंशिक रूप से पूरा हो गया है। 

अधिवक्ता जैन ने मामले में जल्द सुनवाई का आग्रह करते हुए कहा, मामला लोगों के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। पिछले साल 29 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, केजरीवाल ने मकान मालिकों से आग्रह किया था कि उन किरायेदारों से किराए की वसूली न करें, जो गरीबी से त्रस्त हैं और यह भी वादा किया कि कोई किरायेदार गरीबी में भुगतान करने में असमर्थ है तो सरकार उनकी ओर से भुगतान करेगी। 

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया  है कि जब कोई न्यायाधीश किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है तो किसी भी पक्ष को इसके कारणों के बारे में जानने या सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कोई न्यायाधीश मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है तो इसका सम्मान किया जाना चाहिए। चाहे वह इस तथ्य का खुलासा करता है या नहीं। 

न्यायमूर्ति आशा मेनन ने अपने फैसले में कहा कि मामले से स्वयं को अलग करने के कारणों का खुलासा करने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्हें खुलासा करने के लिए मजबूर करना न्याय देने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप होगा। अदालत ने कहा  मामले की सुनवाई होने के कारणों का खुलासा करना है या नहीं, संबंधित न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है। उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2020 को पारित विशेष न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

विस्तार

उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के किराया भुगतान करने में असमर्थ किसी भी व्यक्ति के किराए का भुगतान करने के बयान संबंधी सिंगल जज के आदेश पर रोक लगा दी है। सिंगल जज ने बयान के आधार पर दिल्ली सरकार को किराएदारों के भुगतान के लिए नीति बनाने का निर्देश दिया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार की अपील पर यह रोक लगाई है। पीठ ने 27 सितंबर 2021 को न्यायमूर्ति प्रतिभा एन. सिंह द्वारा पारित फैसले के संचालन, क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए सरकार से भी कहा कि आप कह सकते हैं, तो साहस पूर्वक कहें कि मेरा कोई इरादा नहीं था लेकिन मैंने बयान दिया था। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 27 सितंबर तय की है।  

याचिका पांच प्रवासी मजदूरों द्वारा दायर की गई थी, जो दिल्ली के सीएम द्वारा दिए  बयानों पर विश्वास करते हुए दिल्ली में रुके थे। प्रवासी मजदूरों की ओर से पेश अधिवक्ता गौरव जैन ने बताया कि दिल्ली के सीएम द्वारा दिए बयान और इस तरह के कृत्य से जनता के बीच विश्वास की कमी होगी। दिल्ली सरकार की ओर से पेश गौतम नारायण ने याचिकाकर्ता की वास्तविकता पर सवाल उठाया और कहा कि बयान आंशिक रूप से पूरा हो गया है। 

अधिवक्ता जैन ने मामले में जल्द सुनवाई का आग्रह करते हुए कहा, मामला लोगों के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। पिछले साल 29 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, केजरीवाल ने मकान मालिकों से आग्रह किया था कि उन किरायेदारों से किराए की वसूली न करें, जो गरीबी से त्रस्त हैं और यह भी वादा किया कि कोई किरायेदार गरीबी में भुगतान करने में असमर्थ है तो सरकार उनकी ओर से भुगतान करेगी। 

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