मरते-मरते दो लोगों को जिंदगी दे गया शख्स, किडनी और आंखों को किया दान

सार

नोटो ने दोनों किडनी और कॉर्निया को आवंटित किया। इनमें से एक किडनी एचसीएमसीटी मणिपाल अस्पताल में 59 वर्षीय महिला को दी गई तथा दूसरी किडनी एक निजी अस्पताल में एक 51 वर्षीय पुरुष में प्रत्यारोपित की गई।

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राजधानी में 45 वर्षीय ब्रेन डेड व्यक्ति ने दो लोगों को नई जिदंगी दी हैं। मृतक के परिवार ने उसकी किडनी और कार्नियां दान करने का निर्णय लिया।

नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) ने दोनों किडनी और कॉर्निया को आवंटित किया। इनमें से एक किडनी एचसीएमसीटी मणिपाल अस्पताल में 59 वर्षीय महिला को दी गई तथा दूसरी किडनी एक निजी अस्पताल में एक 51 वर्षीय पुरुष में प्रत्यारोपित की गई। वहीं, दोनों कॉर्निया को नेत्र बैंक में पहुंचा दिया गया है।

एचसीएमसीटी अस्पताल के क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉ. श्रीकांत श्रीनिवासन ने बताया कि मरीज को बेहोशी की हालत में 22 अप्रैल को अस्पताल लाया गया था। जांच करने पर पता चला कि उसे बड़े स्तर पर इंट्राक्रेनियल रक्तस्राव हुआ था। प्रयास के बाद भी मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और शनिवार को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

डॉ. (कर्नल) अवनीश सेठ ने कहा कि जब परिवार ने अंग दान के लिए अपनी सहमति दे दी तो उसकी दोनों किडनियों को निकालकर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर दिया गया। परिवार ने गंभीर रूप से बीमार दो मरीजों की जिंदगी बचा ली और दो अन्य लोगों को दृश्य का उपहार दिया है।

अस्पताल के निदेशक रमन भास्कर ने कहा कि देश में अंगदान के विषय में हो रही धीमी व स्थिर प्रगति से अंगों की उपलब्धता से अनेक मरीजों की जिंदगी बचाने की उम्मीद बढ़ रही है।

विस्तार

राजधानी में 45 वर्षीय ब्रेन डेड व्यक्ति ने दो लोगों को नई जिदंगी दी हैं। मृतक के परिवार ने उसकी किडनी और कार्नियां दान करने का निर्णय लिया।

नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) ने दोनों किडनी और कॉर्निया को आवंटित किया। इनमें से एक किडनी एचसीएमसीटी मणिपाल अस्पताल में 59 वर्षीय महिला को दी गई तथा दूसरी किडनी एक निजी अस्पताल में एक 51 वर्षीय पुरुष में प्रत्यारोपित की गई। वहीं, दोनों कॉर्निया को नेत्र बैंक में पहुंचा दिया गया है।

एचसीएमसीटी अस्पताल के क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉ. श्रीकांत श्रीनिवासन ने बताया कि मरीज को बेहोशी की हालत में 22 अप्रैल को अस्पताल लाया गया था। जांच करने पर पता चला कि उसे बड़े स्तर पर इंट्राक्रेनियल रक्तस्राव हुआ था। प्रयास के बाद भी मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और शनिवार को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

डॉ. (कर्नल) अवनीश सेठ ने कहा कि जब परिवार ने अंग दान के लिए अपनी सहमति दे दी तो उसकी दोनों किडनियों को निकालकर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर दिया गया। परिवार ने गंभीर रूप से बीमार दो मरीजों की जिंदगी बचा ली और दो अन्य लोगों को दृश्य का उपहार दिया है।

अस्पताल के निदेशक रमन भास्कर ने कहा कि देश में अंगदान के विषय में हो रही धीमी व स्थिर प्रगति से अंगों की उपलब्धता से अनेक मरीजों की जिंदगी बचाने की उम्मीद बढ़ रही है।

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