नौकरी लगवाने का झांसा देकर 400 से ज्यादा युवकों को ठगा, दो गिरफ्तार

सार

आरोपी बीते एक वर्ष में 400 से ज्यादा युवकों से कई करोड़ रुपये ठगे चुके हैं। आरोपियों को ठगी का आइडिया कॉल सेंटर में नौकरी करते हुए मिला था और शीघ्र ही अपना कॉल सेंटर खोलने जा रहे थे। 

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रोहिणी जिले की साइबर सेल ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों में अच्छे पैकेज का ऑफर देकर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बीते एक वर्ष में 400 से ज्यादा युवकों से कई करोड़ रुपये ठगे चुके हैं। आरोपियों को ठगी का आइडिया कॉल सेंटर में नौकरी करते हुए मिला था और शीघ्र ही अपना कॉल सेंटर खोलने जा रहे थे। 

इनसे तीन लैपटॉप, नौ सिम कार्ड, नौ मोबाइल फोन, दो वाई-फाई राउटर,47 हजार रुपये, 23 डेबिट कार्ड, 7 चैक बुक और एक कंपनी की फर्जी स्टांप बरामद की है। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से ठगी के तेलंगाना के दो केस सुलझाने का दावा किया है। 

रोहिणी जिला डीसीपी प्रवण तायल ने बताया कि पॉकेट-9 सेक्टर-22, रोहिणी निवासी जतिन पाल ने एनसीआरपी पोर्टल पर आठ अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके पास 5 अप्रैल को एक व्यक्ति का फोन आया। उसने कहा कि उनकी प्रोफाइल नोवार्टिस कंपनी में नौकरी के लिए शॉर्टलिस्ट की गई है। जतिन पाल का गूगल मीट एप्लीकेशन पर आरोपियों द्वारा ऑनलाइन साक्षात्कार और एक टेस्ट कराया गया। 

इसके बाद जतिनपाल को ई-मेल के माध्यम से नियुक्ति पत्र भेजा और सूचित किया कि कंपनी बेस विश्लेषण के लिए कॉग्नोस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती है। आईबीएम की तरफ से कॉग्नोस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सिखाने की एवज में उन्होंने 17700 रुपये मांगे। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने जतिन पाल का फोन उठाना बंद कर दिया। 

एसआई बिजेंद्र कादयान, एसआई शिप्रा सिंह व अन्य की टीम ने जांच शुरू की और 12 अप्रैल को जनकपुरी निवासी सिद्धार्थ कार्की और उत्तम नगर निवासी आयुष राजपूत को 12 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। आयुष ने बीकॉम, जबकि सिद्धार्थ ने बीबीए किया हुआ है।

फोन पर लेते थे फर्जी साक्षात्कार
आरोपी लिंक्डइन, नौकरीडॉटकॉम, हिरिस्टडॉटकॉम, फ्रेशरवर्ल्डडॉटकॉम और मॉन्स्टरडॉटकॉम से नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को डेटा खरीदते थे। इसके बाद योग्यता व अनुभव के आधार पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी की पेशकश करके इच्छुक लोगों को बुलाते थे। ये गूगग मीट एप्लीकेशन के माध्यम से फोन पर फर्जी साक्षात्कार लेते थे। इसके बाद पीड़ित के ई-मेल पते पर फर्जी नियुक्ति पत्र भेज देते थे। अच्छे पैकेज की नौकरी पाकर पीड़ित खुश हो जाता था। फिर पीड़ित से कहते थे कि कंपनी कॉग्नोस टूल के साथ काम करती है। कॉग्नोस टूल पर काम करना आईबीएम कंपनी की तरफ से खुद सिखाएंगे और इस तरह पीड़ित से मोटी रकम ले लेते थे।

विस्तार

रोहिणी जिले की साइबर सेल ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों में अच्छे पैकेज का ऑफर देकर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बीते एक वर्ष में 400 से ज्यादा युवकों से कई करोड़ रुपये ठगे चुके हैं। आरोपियों को ठगी का आइडिया कॉल सेंटर में नौकरी करते हुए मिला था और शीघ्र ही अपना कॉल सेंटर खोलने जा रहे थे। 

इनसे तीन लैपटॉप, नौ सिम कार्ड, नौ मोबाइल फोन, दो वाई-फाई राउटर,47 हजार रुपये, 23 डेबिट कार्ड, 7 चैक बुक और एक कंपनी की फर्जी स्टांप बरामद की है। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से ठगी के तेलंगाना के दो केस सुलझाने का दावा किया है। 

रोहिणी जिला डीसीपी प्रवण तायल ने बताया कि पॉकेट-9 सेक्टर-22, रोहिणी निवासी जतिन पाल ने एनसीआरपी पोर्टल पर आठ अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके पास 5 अप्रैल को एक व्यक्ति का फोन आया। उसने कहा कि उनकी प्रोफाइल नोवार्टिस कंपनी में नौकरी के लिए शॉर्टलिस्ट की गई है। जतिन पाल का गूगल मीट एप्लीकेशन पर आरोपियों द्वारा ऑनलाइन साक्षात्कार और एक टेस्ट कराया गया। 

इसके बाद जतिनपाल को ई-मेल के माध्यम से नियुक्ति पत्र भेजा और सूचित किया कि कंपनी बेस विश्लेषण के लिए कॉग्नोस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती है। आईबीएम की तरफ से कॉग्नोस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सिखाने की एवज में उन्होंने 17700 रुपये मांगे। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने जतिन पाल का फोन उठाना बंद कर दिया। 

एसआई बिजेंद्र कादयान, एसआई शिप्रा सिंह व अन्य की टीम ने जांच शुरू की और 12 अप्रैल को जनकपुरी निवासी सिद्धार्थ कार्की और उत्तम नगर निवासी आयुष राजपूत को 12 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। आयुष ने बीकॉम, जबकि सिद्धार्थ ने बीबीए किया हुआ है।

फोन पर लेते थे फर्जी साक्षात्कार

आरोपी लिंक्डइन, नौकरीडॉटकॉम, हिरिस्टडॉटकॉम, फ्रेशरवर्ल्डडॉटकॉम और मॉन्स्टरडॉटकॉम से नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को डेटा खरीदते थे। इसके बाद योग्यता व अनुभव के आधार पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी की पेशकश करके इच्छुक लोगों को बुलाते थे। ये गूगग मीट एप्लीकेशन के माध्यम से फोन पर फर्जी साक्षात्कार लेते थे। इसके बाद पीड़ित के ई-मेल पते पर फर्जी नियुक्ति पत्र भेज देते थे। अच्छे पैकेज की नौकरी पाकर पीड़ित खुश हो जाता था। फिर पीड़ित से कहते थे कि कंपनी कॉग्नोस टूल के साथ काम करती है। कॉग्नोस टूल पर काम करना आईबीएम कंपनी की तरफ से खुद सिखाएंगे और इस तरह पीड़ित से मोटी रकम ले लेते थे।

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