जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद ने अदालत के समक्ष पेश किए दस्तावेज, कहा- शब्दों के निकाले गलत अर्थ

सार

सुनवाई के दौरान खालिद के वकील ने बताया कि केस कानूनों के संकलन सहित दस्तावेज कोर्ट को सौंप दिए गए हैं। दस्तावेज में क्रांतिकारी और इंकलाब का अर्थ समझाने के लिए सामग्री शामिल है।

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दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद ने कहा कि अमरावती में दिए गए भाषण में उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए क्रांतिकारी और इंकलाब शब्दों के गलत अर्थ निकाले गए हैं। उन्होंने अदालत के समक्ष सामग्री व दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि यह दंगों से पहले दिए भाषण में अर्थ की सही व्याख्या करते हैं।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनके द्वारा पेश दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं आए हैं, इसलिए मामले की सुनवाई शुक्रवार को की जाएगी। खालिद पर भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराध का मुकदमा चल रहा है।

सुनवाई के दौरान खालिद के वकील ने बताया कि केस कानूनों के संकलन सहित दस्तावेज कोर्ट को सौंप दिए गए हैं। दस्तावेज में क्रांतिकारी और इंकलाब का अर्थ समझाने के लिए सामग्री शामिल है।

बुधवार को खालिद की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल किया था कि उमर खालिद का क्या मतलब था जब उन्होंने अमरावती में अपने भाषण में इंकलाब और क्रांतिकारी शब्दों का इस्तेमाल किया था।

पीठ ने खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस से उन शब्दों के अर्थ और संदर्भ के बारे में बताने के लिए कहा था, जिसमें उनका इस्तेमाल किया गया था, क्योंकि इसे समझने के लिए यह समझना आवश्यक था कि क्या वह उस साजिश का हिस्सा थे, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली दंगे हुए थे।

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 24 मार्च को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा था कि वह विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा था। दिल्ली पुलिस ने खालिद को इस मामले में 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया था और उसी वर्ष 22 नवंबर को यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया था।

दिल्ली दंगों के एक आरोपी को अदालत ने किया बरी
अदालत ने दिल्ली दंगों के एक मामले में पुलिसकर्मियों की गवाही को संदेह के दायरे में लेते हुए आरोपी नूर मोहम्मद को बरी कर दिया। मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में एक बेकरी में कथित रूप से तोड़फोड़ और लूट से संबंधित है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने कहा कि गवाह बीट अधिकारी ने आरोपी को 2 अप्रैल 2020 को पुलिस स्टेशन में एक दंगाई के रूप में उस समय पहचाना जब उससे पूछताछ की जा रही थी। अदालत ने कहा यह तथ्य पूरी तरह से संदिग्ध और भरोसे से रहित प्रतीत होता है।

विस्तार

दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद ने कहा कि अमरावती में दिए गए भाषण में उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए क्रांतिकारी और इंकलाब शब्दों के गलत अर्थ निकाले गए हैं। उन्होंने अदालत के समक्ष सामग्री व दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि यह दंगों से पहले दिए भाषण में अर्थ की सही व्याख्या करते हैं।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनके द्वारा पेश दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं आए हैं, इसलिए मामले की सुनवाई शुक्रवार को की जाएगी। खालिद पर भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराध का मुकदमा चल रहा है।

सुनवाई के दौरान खालिद के वकील ने बताया कि केस कानूनों के संकलन सहित दस्तावेज कोर्ट को सौंप दिए गए हैं। दस्तावेज में क्रांतिकारी और इंकलाब का अर्थ समझाने के लिए सामग्री शामिल है।

बुधवार को खालिद की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल किया था कि उमर खालिद का क्या मतलब था जब उन्होंने अमरावती में अपने भाषण में इंकलाब और क्रांतिकारी शब्दों का इस्तेमाल किया था।

पीठ ने खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस से उन शब्दों के अर्थ और संदर्भ के बारे में बताने के लिए कहा था, जिसमें उनका इस्तेमाल किया गया था, क्योंकि इसे समझने के लिए यह समझना आवश्यक था कि क्या वह उस साजिश का हिस्सा थे, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली दंगे हुए थे।

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 24 मार्च को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा था कि वह विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा था। दिल्ली पुलिस ने खालिद को इस मामले में 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया था और उसी वर्ष 22 नवंबर को यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया था।

दिल्ली दंगों के एक आरोपी को अदालत ने किया बरी

अदालत ने दिल्ली दंगों के एक मामले में पुलिसकर्मियों की गवाही को संदेह के दायरे में लेते हुए आरोपी नूर मोहम्मद को बरी कर दिया। मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में एक बेकरी में कथित रूप से तोड़फोड़ और लूट से संबंधित है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने कहा कि गवाह बीट अधिकारी ने आरोपी को 2 अप्रैल 2020 को पुलिस स्टेशन में एक दंगाई के रूप में उस समय पहचाना जब उससे पूछताछ की जा रही थी। अदालत ने कहा यह तथ्य पूरी तरह से संदिग्ध और भरोसे से रहित प्रतीत होता है।

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